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नुमाइश …Numaaish..!!! By pradeeppathak
आज फिर नुमाइश गया था ..
चरखे मे बैठा ..
शहर का मुजायेरा किया ..बड़े बड़े हाथी भी ..
छोटे हो गए ..
मै खुश था ..
बहुत खुश ..अपने को सबसे ऊँचा देख ..
बलवान समझ बैठा ..
चरखा घूम के नीचे आया ..मै वापस ज़मीन मे था …
पैरों के तलवे -
अभी तक ऊंचाई को ,
महसूस कर रहे थे ..दिल की धड़कने ..
रक्त के प्रवाह को ..
तेज़ किये हुए थीं ..नज़ारा मेरी आँखों के सामने..
अभी तक थमा नहीं था …पर ये क्या!
मै फिर से गुलाम हो गया ..
सब वापस उतने ही बड़े थे ..
जितना की मैंने पहले देखा था ..चिलमिलाती धुप ..
जो और तेज़-
और चमकदार थी अब तक!
पेडों ने ढांक लिया उसको ..पागल हूँ मै,
न जाने क्या क्या -
सोचता रहता हूँ.
नुमाइश भी कभी -
सुकून दे सकी है ज़िन्दगी को

salil shivan 1:54 pm on July 18, 2010 | #
mashah allah….imagination and illusion…aapne tho insaan ke sapne k sach batha diya….
Sherlyn 11:39 pm on August 7, 2011 | #
So true. Honesty and eyvertihng recognized.