Maa Meri
660 views
This is a special dedication by Rishi, Biswajit and Vishwa to their mother.
Vishwa, the song writer for the song says
यूँ तो कवि होने का अर्थ यह माना जाता है कि बंदा किसी भी विषय पर लिख सकता है, अपने भाव व्यक्त कर सकता है और अमूमन ऎसा होता भी है। लेकिन दुनिया में अकेली एक ऎसी चीज है जिसे आज तक कोई भी शब्दों में बाँध नहीं सका है। और उस शय का नाम है “माँ”। माँ….जो बच्चे के मुख से निकला पहला शब्द होता है और शायद अंतिम भी ,माँ जो हर रोज सुबह को जगाती है और शाम को चादर दे सुला देती है, माँ जो हर कुछ में है लेकिन ऎसा व्यक्त करती है मानो कुछ में भी न हो। माँ…….जो पिता का संबल है, बेटे की जिद्द है और बेटी की रीढ है … माँ जो निराशा में आशा की एक किरण है , चोट में मलहम है , धूप में गीली मिट्टी है और ठंढ में हल्की सी धूप है ,माँ …..जो और कुछ नहीं, बस माँ है… बस माँ!!
Composed By: Rishi S
Sung By: Biswajit Nanda
Written By: Vishwa Deepak
Share by copy pasting on your webpage/blog/

Lyrics: माँ मेरी लोरी की पोटली,
माँ मेरी पूजा की आरती,
माँ मेरी …
अपनों की जीत में,
बरसों की रीत में,
माँ की जाँ है,
प्यारी-सी ओट दे,
थामे है चोट से,
माँ तो माँ है,
चंपई दिन में,छाया-सी साथ है,
मन की मटकी, मैया के हाथ है।
माँ मेरी लोरी की पोटली,
माँ मेरी पूजा की आरती,
माँ मेरी …
मेरी हीं साँस में,
सुरमई फाँस में,
माँ की जाँ है,
रिश्तों की डोर है,
हल्की-सी भोर है,
माँ तो माँ है,
रब की रब है, काबा है,धाम है,
झुकता रब भी, माँ ऎसा नाम है।
माँ मेरी थोड़ी-सी बावली,
माँ मेरी भोली सी मालिनी
माँ मेरी पूजा की आरती।
माँ मेरी …
Biswajit, the singer for the song says
माँ ,
“इस धरती पर मेरी देवी हो आप,
ममता की मूरत हो आप,
मेरे लिए सारा संसार हो आप ”
मुझे आज भी याद है बचा हुआ एक लड्डू आप मुझे खिला देती थीं, खुद न खाते हुए भी . खुदके लिए कुछ भी न खरीदकर मेरे लिए किताबें खरीदती थीं . रात रात भर जागके मुझे पढाती थी . साइंस के काम्प्लेक्स चीजों को समझने को कोशिश करती थी मुझे पढाने के लिए .
क्या इन सबको मैं शब्दों में बयां कर सकता हूँ ?
उस दिन मैंने आपसे पुछा था “माँ ! कुछ लाऊँ आप के लिए विदेश से? आप बोली: तू ठीक है न बेटा , मेरे लिए सारा संसार तो तू ही है , तू ही आजा ना जल्दी ”
इस प्यार का क्या कोई मोल है माँ ? हैरान हूँ में ये सोचकर कि आपमें इतना निस्वार्थ प्यार कैसे है? आपसे मैं बहुत प्यार करता हूँ माँ . आपको सारी ख़ुशी मिले यही दुआ है मेरी.
Rishi, the composer for the song, says
Just like a root note forms the basis of every piece of music, the one relationship which forms the basis of each one of our lives is that of the Mother. The divinity and emotions attached with this relationship cannot be expressed with the words and deeds alone. The “purity” associated with the sound of music tries to fill this gap and one such attempt is this song of devotion and love.



Leave a Comment